फलोदी, 25 सितंबर। आदर्श शिक्षा संस्थान, जोधपुर द्वारा संचालित आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय, फलोदी के तत्वावधान में ‘वन्दे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आज 25 सितंबर को प्रातः 11:00 बजे फलोदी क्षेत्र के 32 विद्यालयों में सामूहिक वन्दे मातरम् गायन का आयोजन किया गया। निर्धारित समय पर सभी विद्यालयों में एक साथ वन्दे मातरम् का गायन हुआ।
कार्यक्रम में कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के साथ अभिभावक एवं आचार्यगण भी सहभागी बने। सभी विद्यालयों में मिलाकर कुल 4,679 विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं आचार्यों ने सामूहिक रूप से वन्दे मातरम् का गायन किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रभु सिंह राठौड़ ने बताया कि कार्यक्रम को व्यापक रूप देने के लिए आदर्श विद्या मंदिर, फलोदी की ओर से क्षेत्र के अन्य विद्यालयों से पूर्व संपर्क किया गया। कार्यक्रम की जानकारी के लिए पोस्टर एवं पेम्पलेट वितरित किए गए तथा कार्यक्रम से एक दिन पूर्व संबंधित विद्यालयों में संपर्क कर सामूहिक गायन की रूपरेखा एवं समय की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम को केवल सामूहिक गायन तक सीमित न रखते हुए विद्यार्थियों को वन्दे मातरम् के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय महत्व से परिचित कराने के लिए बौद्धिक सत्र भी आयोजित किया गया। इसके लिए विशंभर थानवी द्वारा विषय-वक्ताओं की योजना तैयार की गई तथा विद्यालय की ओर से बौद्धिककर्ताओं ने वन्दे मातरम् गायन से पूर्व विद्यार्थियों को इसके इतिहास एवं प्रासंगिकता की जानकारी दी।
बौद्धिक सत्र में वन्दे मातरम् के 150 वर्ष के इतिहास, भारतीय सांस्कृतिक चेतना, प्रकृति एवं मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, स्वतंत्रता आंदोलन में इसकी भूमिका तथा राष्ट्रीय जीवन में इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला गया। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत किस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में सामने आया और आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन में किस प्रकार जन-जागरण का माध्यम बना।
वक्ताओं ने वन्दे मातरम् के विभिन्न ऐतिहासिक पड़ावों का उल्लेख करते हुए बताया कि इसकी रचना से लेकर आनंदमठ में समावेश, कांग्रेस के अधिवेशनों में गायन, 1905 के बंग-भंग आंदोलन के दौरान इसकी लोकप्रियता तथा स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न चरणों तक इसकी यात्रा भारतीय राष्ट्रीय चेतना के विकास से जुड़ी रही है।
बौद्धिक में ‘वन्दे मातरम् इतना लंबे समय तक क्यों प्रासंगिक रहा’, इसके सांस्कृतिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय संदर्भ, ‘शस्य-श्यामला’ भारत की प्रकृति-कल्पना, अथर्ववेद के ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’ भाव, ‘बाहुबल धारिणीम्’ के माध्यम से स्व-बोध तथा स्वतंत्रता पूर्व के राष्ट्रीय परिवेश जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।
साथ ही विद्यार्थियों को वन्दे मातरम् के विभिन्न ऐतिहासिक प्रसंगों से अवगत कराया गया—इसकी रचना के प्रारंभिक स्वरूप से लेकर आनंदमठ में समावेश, 1886 एवं 1896 के कांग्रेस अधिवेशनों में इसके गायन, 1905 के बंग-भंग आंदोलन में इसके व्यापक प्रयोग तथा बाद के वर्षों में इसे लेकर हुए विमर्श तक की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि स्वतंत्र भारत में ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान तथा ‘वन्दे मातरम्’ को राष्ट्रगीत का सम्मान प्राप्त हुआ। इस प्रकार दोनों ही रचनाएँ भारतीय राष्ट्रीय जीवन में अपनी-अपनी विशिष्ट भूमिका रखती हैं।
विद्यालय परिवार ने इस अवसर को केवल एक गायन कार्यक्रम न मानकर नई पीढ़ी को भारतीय इतिहास, संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और मातृभूमि के प्रति कर्तव्यबोध से जोड़ने का अवसर बताया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में आदर्श विद्या मंदिर फलोदी के आचार्यगण, विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक, विद्यार्थी एवं अभिभावकों का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

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