फलोदी, [आज की तिथि]: जैन समाज के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा। परम पूज्य दिव्य तपस्वी आचार्य देव श्रीमद् विजय हंसरत्न सूरीश्वर जी महाराज एवं युवा उपधान तप प्रेरक, प्रवचन प्रभावक परम पूज्य आचार्य देव श्रीमद् विजय तत्व दर्शन सूरीश्वर जी महाराज आदि ठाणा का फलोदी महानगर में भव्य चातुर्मास प्रवेश हुआ।
आचार्य श्री हंसरत्न सूरीश्वर जी म.सा. ने अब तक 108 बार एक सौ अस्सी एवं 117 से अधिक मासक्षमण जैसी कठोर तपस्याएं कर जैन जगत को नई प्रेरणा दी है। आचार्य श्री तत्व दर्शन सूरीश्वर जी म.सा. को बच्चों के उपधान तप में महारत हासिल है और वे युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं।
चातुर्मास प्रवेश यात्रा का शुभारंभ दादीमां नगर से हुआ। बैंड-बाजों, ध्वज-पताकाओं और जयकारों के साथ यात्रा फलोदी के प्रमुख राजमार्गों से गुजरी। लगभग दो घंटे तक चली इस भव्य सामैया यात्रा में पूरा नगर गुरु भगवंतों के स्वागत के लिए उमड़ पड़ा। घर-घर के बाहर रंगोली, तोरण और गौहली सजाकर श्रावक-श्राविकाओं ने गुरुदेवों की अगवानी की।
इस मंगल अवसर पर दिल्ली, मुंबई, सांगली, कोल्हापुर, जोधपुर, जयपुर सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु फलोदी पहुंचे। फलोदी के जो परिवार चेन्नई सहित अन्य महानगरों में बसे हैं, वे भी विशेष रूप से इस सामैया में शामिल होने आए।
प्रवेश के पश्चात आयोजित धर्मसभा में आचार्य श्री तत्व दर्शन सूरीश्वर जी म.सा. ने अत्यंत मार्मिक प्रवचन दिया। गुरुदेव ने कहा, "जीव मात्र के प्रति प्रेम रखो। प्रत्येक आत्मा में परमात्मा का वास है। किसी भी जीव से नफरत करना, अपने ही आत्म-धर्म से विमुख होना है।" उन्होंने समझाया कि द्वेष की भावना हमारे कर्म बंधन का कारण बनती है, जबकि करुणा और मैत्री से आत्मा निर्मल होती है।
आचार्य श्री हंसरत्न सूरीश्वर जी म.सा. ने आशीर्वचन में फलोदी की धर्मनिष्ठ जनता की अनुमोदना की और कहा कि चातुर्मास काल आत्म-साधना का स्वर्णिम अवसर है। इस दौरान तप, त्याग और स्वाध्याय से जीवन को ऊंचा उठाना चाहिए।
श्री संघ फलोदी ने सभी पधारे हुए गुरु भगवंतों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया। चातुर्मास काल में प्रतिदिन प्रवचन, शिविर एवं धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला चलेगी।
*निवेदक*:
सकल जैन संघ फलोदी
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