फलोदी। जैन समाज में चल रहे सिद्धि तप की तपश्चर्या के उपलक्ष्य में 7 दिवसीय भव्य महोत्सव ,17 सितंबर को होगा सामूहिक पारणा, रजवाड़ी रथयात्रा वरघोड़े में उमड़ा जन सैलाब

 

फलोदी। की पावन धरा पर तपस्वी आचार्य श्री हंसरत्न सूरीश्वरजी महाराज, प्रवचन प्रभावक आचार्य श्री तत्वदर्शन सूरीश्वरजी महाराज एवं पन्यास प्रवर गुरुदेव श्री धर्मध्यान विजयजी महाराज आदि श्रमण-श्रमणी (साधु-साध्वी) भगवंतों की पावन निश्रा और प्रेरणा से चल रही जैन धर्म की अत्यंत प्रभावक साधना *'सिद्धिदायक सिद्धि तप'* की ऐतिहासिक पूर्णाहुति पर आध्यात्मिक उल्लास चरम पर है। करीब 150+ साधकों के संकल्प से शुरू हुई इस 44 दिवसीय कठोर साधना को लगभग 80 तपस्वियों ने अटूट मनोबल के साथ पूर्ण किया है। 

इन सभी तपस्वियों का सामूहिक पारणा महोत्सव पूज्य गुरुभगवंतों के सानिध्य में आगामी दिनांक 17 सितंबर 2026 को विधि-विधान के साथ आयोजित किया जाएगा।

संघ के मीडिया प्रभारी अरुण कोचर ने बताया कि सप्त दिवसीय महोत्सव और ऐतिहासिक रजवाड़ी वरघोड़ा

पूज्य संतों के मंगल सानिध्य और सकल जैन समाज के तत्वावधान में तपस्वियों की अनु‌मोदनार्थ व गुणानुवाद के लिए 7 दिवसीय भव्य महोत्सव का आयोजन किया गया। 

इस महोत्सव के अंतिम चरण में नगर में एक विशाल एवं ऐतिहासिक रजवाड़ी रथयात्रा (वरघोड़ा) निकाली गई। पारंपरिक राजस्थानी, पंजाबी व रजवाड़ी अंदाज में सजे रथों, ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ निकले इस वरघोड़े ने समूचे फलोदी नगर को धर्ममय बना दिया, जगह-जगह श्रद्धालुओं ने चावल एवं पुष्प वर्षा कर गुरुभगवंतों व तपस्वियों का भव्य स्वागत किया।

देशभर से उमड़े प्रवासी फलोदीवासी और तपस्वी परिवारों के सगे-संबंधी इस आध्यात्मिक उत्सव का मुख्य आकर्षण रहे। 

अप्रवासी एवं फलोदी वासियों की व्यापक सहभागिता रही। 

स्थानीय समाज के साथ-साथ विशेष रूप से चेन्नई, सोलापुर, अहमदाबाद, बैंगलोर, कोयम्बतोर, मुम्बई एवं नन्दुरबार क्षैत्र सहित देश के विभिन्न महानगरों में निवास कर रहे फलोदी निवासी प्रवासी बंधु और उनके सगे-संबंधी बड़ी संख्या में अपने पैतृक नगर पहुंचे। पूज्य संतों के दर्शन-वंदन और तपस्वियों की अनुमोदना के लिए जुटे इस विशाल जनसमूह ने आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया।

महोत्सव की मुख्य झलकियां:

पावन सानिध्य: तपस्वी आ.श्री हंसरत्न सूरीश्वरजी म.सा., प्रवचन प्रभावक आ.श्री तत्वदर्शन सूरीश्वरजी म.सा. और पन्यास गुरुदेव श्री धर्मध्यान विजयजी म.सा. आदि साधु-साध्वी वृंद की विशेष पावन निश्रा।

 तप की पूर्णता: 150 आराधकों से शुरुआत के बाद 80 तपस्वियों द्वारा 44 दिवसीय कठिन साधना (36 उपवास व 8 पारणा) की सफल पूर्णता।

भव्य आयोजन: 7 दिनों तक चलने वाले विविध भक्तिमय और धार्मिक अनुष्ठान।

विशाल वरघोड़ा: रजवाड़ी ठाठ-बाट के साथ निकला भव्य जुलूस, जिसमें स्थानीय व प्रवासी समाज की संयुक्त भागीदारी रही।

 पारणा दिवस: 17 सितंबर 2026 को सामूहिक पारणा के साथ तपस्या का विधिवत समापन।

सकल जैन समाज, आयोजन समिति और व्यवस्था समिति ने समस्त धर्मप्रेमी जनता से 17 सितंबर को आयोजित होने वाले पावन पारणा महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर पूज्य गुरुभगवंतों के दर्शन-प्रवचन का लाभ लेने और तपस्वियों की अनुमोदना कर धर्मलाभ अर्जित करने का आह्वान किया है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ