देहरादून/फलोदी। जहां राजस्थान की धरती पर गर्मियों में तापमान 50 डिग्री सेल्सियस से भी ज्यादा पहुंच जाता है, वहीं आइस हॉकी जैसे खेल के लिए आवश्यक बर्फ, रिंक और आधुनिक सुविधाओ के लिए कोई सोचता तक नहीं है, ओर निकट भविष्य के लिए भी एक सपना ही लगता हैं।
एक व्यक्ति ने अलग ही सपना देखा ओर उसे जीवित करने में लग गया, ओर यही से लगा कि सपनों की उड़ान संसाधनों की मोहताज नहीं होती। इसका जीवंत उदाहरण बनकर सामने आए हैं राजस्थान के अंडर-12 आइस हॉकी खिलाड़ी, जिन्होंने तमाम अभावों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर कांस्य पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया है।
फलोदी और राजस्थान के विभिन्न क्षेत्रों से आए इन नन्हे खिलाड़ियों ने महीनों तक सीमेंट के मैदानों पर इनलाइन स्केट्स पहनकर अभ्यास किया। न उनके पास पूर्ण खेल संसाधन थे और न ही आइस रिंक था, न अत्याधुनिक उपकरण और न ही पर्याप्त आर्थिक सहयोग। इसके बावजूद इसको तैयार कर रहे कोच के इरादों में कोई कमी नहीं आई।
जब ये खिलाड़ी देहरादून के हिमाद्रि आइस रिंक में उतरे, तब उनके सामने वे टीमें थीं जिनके पास खुद का पूर्ण खेल संसाधन है, जिन्हें सालभर में कई बार बर्फ पर अभ्यास करने का अवसर मिलता है। लेकिन राजस्थान के बच्चों ने साबित कर दिया कि जीत केवल सुविधाओं से नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और जुनून से हासिल होती है।
महाराष्ट्र, तमिलनाडु और पंजाब जैसी मजबूत टीमों को चुनौती देते हुए राजस्थान ने आईएचआई नेशनल अंडर-12 आइस हॉकी चैम्पियनशिप 2026 में कांस्य पदक जीत लिया। यह उपलब्धि केवल एक पदक नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और आत्मविश्वास की जीत है।
इन बच्चों ने यह संदेश दिया है कि यदि अवसर मिले तो राजस्थान की प्रतिभाएं किसी भी मंच पर अपना परचम लहरा सकती हैं। लेकिन यह उपलब्धि एक महत्वपूर्ण सवाल भी खड़ा करती है—जब बिना सुविधाओं के ये खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत सकते हैं, तो उचित संसाधन और सहयोग मिलने पर वे कितनी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं?
"आज आवश्यकता है कि राज्य सरकार, खेल विभाग, जिला प्रशासन, जनप्रतिनिधि, उद्योगपति और समाज के प्रबुद्ध लोग इन प्रतिभाओं की ओर संवेदनशीलता से देखें। खेल अवसंरचना, सिंथेटिक रिंक, प्रशिक्षण सुविधाएं और आधुनिक उपकरण केवल खिलाड़ियों की जरूरत नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य में निवेश हैं।"
"राजस्थान के इन नन्हे खिलाड़ियों ने अपना कर्तव्य निभा दिया है। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। अब जिम्मेदारी व्यवस्था और समाज की है कि वह इन सपनों को नई उड़ान दे।"
क्योंकि आज का यह कांस्य पदक आने वाले कल के अंतरराष्ट्रीय और ओलंपिक पदकों की नींव बन सकता है।
टैगलाइन:
"रेगिस्तान की तपती रेत से बर्फ के मैदान तक... हौसलों ने वो कर दिखाया, जो संसाधन भी नहीं कर सके।"
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