फलोदी, 1 जुलाई 2026: दिव्य तपस्वी परम पूज्य आचार्य देव श्रीमद विजय हंसरत्न सूरीश्वर जी महाराज एवं प्रवचन प्रभावक परम पूज्य आचार्य देव श्रीमद विजय तत्त्वदर्शन सूरीश्वर जी महाराज आदि गुरु भगवंतों की पावन निश्रा में फलोदी नगर में तीन दिवसीय भव्य जैन दीक्षा महोत्सव, चातुर्मास प्रवेश एवं पंन्यास पद प्रदान कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और धर्ममय वातावरण में संपन्न हुआ।
तीन दिवसीय महोत्सव का क्रम:
प्रथम दिवस: कार्यक्रम का शुभारंभ प्रथम परमात्मा के भव्य अभिषेक से हुआ। संध्या बेला में फलोदी महानगर में ऐतिहासिक बिन्दोली का आयोजन किया गया। ठाठ-बाट और जय-जयकार के साथ निकली बिन्दोली में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। नगर का कोना-कोना नवकार महामंत्र से गूंज उठा।
द्वितीय दिवस: सुबह मुमुक्षु द्वारा धारण किए जाने वाले संयम वस्त्रों को केसर मिश्रित जल से रंगने का सुंदर एवं भावपूर्ण कार्यक्रम संपन्न हुआ। यह दृश्य त्याग और वैराग्य की अनुपम झलक दे रहा था। संध्या को भव्य विदाई समारोह का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में मुख्य विषय रहा: "युवा ओम भाई संयम जीवन क्यों अंगीकार कर रहे हैं? संसार क्यों छोड़ रहे हैं?" इस अवसर पर आचार्य भगवंतों ने संयम पथ की महिमा, संसार की असारता और आत्म कल्याण के मार्ग पर मार्मिक प्रवचन दिया। उपस्थित श्रोतागण भाव-विभोर हो गए।
तृतीय दिवस: आज ब्रह्म मुहूर्त में प्रातः 5 बजे शुभ लग्न में मुमुक्षु ओम भाई ने सांसारिक जीवन का त्याग कर जैन भागवती दीक्षा अंगीकार की। दीक्षा विधि आचार्य श्री हंसरत्न सूरीश्वर जी म.सा. के मुखारविंद से संपन्न हुई। नवदीक्षित मुनि भगवंत को आशीर्वाद देने हेतु देशभर से हजारों श्रद्धालु फलोदी पहुंचे।
दीक्षा का महत्व: आचार्य श्री ने फरमाया कि दीक्षा आत्मा का परमात्मा से मिलन का पर्व है। यह संसार के बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष मार्ग पर बढ़ने का प्रथम चरण है। संयम ही जीवन की सच्ची शोभा है।
चातुर्मास प्रवेश: इस पावन अवसर पर आचार्य भगवंतों ने फलोदी नगर में चातुर्मास प्रवेश की घोषणा की। चातुर्मास काल में चार माह तक गुरु भगवंत फलोदी में स्थिरवास कर धर्म की गंगा बहाएंगे। प्रतिदिन प्रवचन, तत्वचर्चा, शास्त्र वाचन, ध्यान-साधना और तप-त्याग के विभिन्न कार्यक्रम होंगे। इससे फलोदी नगर का वातावरण धर्ममय हो जाएगा और श्रावक-श्राविकाओं को आत्म उत्थान का सुअवसर प्राप्त होगा।
पंन्यास पद प्रदान: महोत्सव के दौरान परम पूज्य गणीवर्य श्री धर्मध्यान विजय जी महाराज की योग्यता, तप, त्याग और शास्त्र ज्ञान को देखते हुए आचार्य भगवंतों ने उन्हें "पंन्यास पद" प्रदान कर अलंकृत किया। पंन्यास पद जैन शासन में एक अत्यंत प्रतिष्ठित पद है जो शास्त्रज्ञ और चारित्रनिष्ठ संतों को दिया जाता है। यह गुरु परंपरा की गरिमा और शिष्य की पात्रता का प्रतीक है।
गुरु भगवंतों की महिमा: आचार्य श्री हंसरत्न सूरीश्वर जी एवं आचार्य श्री तत्त्वदर्शन सूरीश्वर जी महाराज वर्तमान में जैन शासन के तेजस्वी नक्षत्र हैं। आपकी प्रेरणा से सैकड़ों युवाओं ने संयम मार्ग अपनाया है। आपका जीवन कठोर तप, जीवदया और जिनशासन सेवा के लिए समर्पित है।
सम्पूर्ण महोत्सव का संचालन श्री फलोदी जैन श्वेतांबर श्री संघ द्वारा किया गया। संघ के अध्यक्ष एवं सभी पदाधिकारियों ने पधारे हुए गुरु भगवंतों एवं श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त किया।
यह आयोजन फलोदी के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गया है।
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