आंधी के बाद अंधेरे में अस्पताल बाप राजकीय अस्पताल में रातभर बिजली नहीं जनरेटर भी बंद

फलोदी। राज्य सरकार एक तरफ जननी सुरक्षा, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए नई नई योजना प्रारंभ कर अनेक कार्यक्रम,अभियान चलाकर कई योजनाओं को धरातल पर लागू करते आ रही है। वहीं दूसरी तरफ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सही मॉनिटरिंग के अभाव में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बात करे बाप उपखंड मुख्यालय की तो यहां पर प्रशासनिक अधिकारी बैठते है लेकिन अधिकारी सरकारी संस्थाओं की वास्तविक स्थिति पर गौर नहीं करते कभी देखे नहीं गए। फलोदी के बाप नगर स्थित सरकारी बड़े हॉस्पिटल में शुक्रवार रात्रि अचानक तेज आंधी आने से 3 बजे से बिजली चली गई। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज लोहिया ने उच्च अधिकारियों को पत्र भेज कर पीड़ा व्यक्त करते बताया कि सीएचसी बाप में संस्थागत प्रसव के लिए भर्ती महिलाओं प्रसुताओं को नवजात शिशुओं को भयंकर आंधी, गर्मी में हाथ पंखी से हवा देनी पड़ रही है। प्रसुताओं से बातचीत करने पर बताया कि नवजात शिशु गर्मी से बहुत परेशान होते है। शुक्रवार रात्रि मामूली आंधी के बाद रात ,3 बजे से शनिवार सुबह सात बजे सुबह तक विद्युत व्यवस्था ठप्प रही। प्रसूताओं के वार्ड में लाइट नहीं होने से मोबाइल की टॉर्च जलाकर उजाला कर नवजात बच्चों को प्रसुताओं द्वारा हाथ पंखे से या कपड़े से हवा देकर राहत पहुंचाने का जतन प्रसुताओं के साथ आए परिजनों ने किया।
ऐसा नहीं है कि अस्पताल परिसर में जनरेटर की व्यवस्था नहीं है जनरेटर है लेकिन वो खराब बताया जा रहा है। सूचना पर जागरूक नागरिकों रात्रि ड्यूटी के कार्मिक से पूछा तो जनरेटर खराब होना बताया। यहां तक कि किसी अधिकारी ने विद्युत विभाग को खबर तक नहीं दी कि 3 बजे से लाइट हॉस्पिटल की बंद है। ज्ञात रहे एमरजेंसी वार्ड में इन्वेटर लगा होने के कारण रात्रि में ड्यूटी करने वाले कार्मिक को कोई परेशानी नहीं होती वे आराम से नींद लेते रहे। हाल ही में बीकानेर में एक साथ कई प्रसुताओं की मौत का मामला गरमाया हुआ है जिसपर गंभीर चिंतन चल रहा है। फिर भी बाप का चिकित्सा विभाग प्रसुताओं, नवजात शिशुओं की सुरक्षा के प्रति गंभीर नहीं है।

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