विश्व युवा कौशल दिवस पर फलोदी में 'दूसरा दशक' का 15वां सिलाई शिविर शुरू, 41 युवा महिलाएं ले रही हैं भाग

फलोदी। विश्व युवा कौशल दिवस के विशेष अवसर पर आज फलोदी क्षेत्र में ग्रामीण युवा महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और समग्र सशक्तिकरण के उद्देश्य से 15वें निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण शिविर का भव्य शुभारंभ हुआ। गैर-सरकारी संस्था 'दूसरा दशक' द्वारा आयोजित इस शिविर में क्षेत्र की 41 युवा महिलाएं भाग ले रही हैं ।

300 से अधिक महिलाएं बन चुकी हैं स्वावलंबी

'दूसरा दशक' की इस निरंतर गतिविधि के तहत अब तक आयोजित किए गए 14 सफल शिविरों के माध्यम से क्षेत्र की 317 युवा महिलाएं सिलाई का हुनर सीखकर लाभान्वित हो चुकी हैं और आज अपने परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान कर रही हैं। फलोदी में जेठी देवी जोगराज शर्मा फाउंडेशन के सहयोग से शिविरों का आयोजन किया जा रहा है ।
आज शिविर के उद्घाटन सत्र में संस्था के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने सभी 41 प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया और उम्मीद जताई कि यह 2 माह का सफर इन महिलाओं के जीवन में एक नया और सकारात्मक बदलाव लेकर आएगा।

पूर्व प्रतिभागियों में से ही तैयार होते हैं प्रशिक्षक (मास्टर ट्रेनर)

इस अभियान की सबसे अनूठी और खास बात यह है कि शिविरों का संचालन करने वाले प्रशिक्षक कहीं बाहर से नहीं आते, बल्कि इसी मंच से तैयार होते हैं। प्रशिक्षण के दौरान 'दूसरा दशक' के वरिष्ठ कार्मिकों द्वारा प्रतिभागियों में मौजूद दक्षता, धैर्य, संवाद और सिखाने की क्षमता जैसे जरूरी नेतृत्व गुणों की सूक्ष्मता से परख की जाती है। बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली इन्हीं प्रतिभावान महिलाओं को आगे चलकर अगले शिविरों के लिए 'मास्टर ट्रेनर' (प्रशिक्षक) के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जाती है। यह मॉडल न केवल महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ाता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करता है। वर्तमान शिविर में कुसुम छींपा व कीर्ति जैन प्रशिक्षक की भूमिका निभायेंगी ।

हुनर के साथ टूटेगी चुप्पी

स्वास्थ्य और अधिकारों पर भी होगी खुलकर बात
यह शिविर सिर्फ कैंची और धागे तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे महिलाओं के समग्र विकास का मंच बनाया गया है। शिविर के दौरान युवा महिलाओं के स्वास्थ्य, पोषण और व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे उन संवेदनशील विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिन पर ग्रामीण परिवेश में आमतौर पर महिलाएं चुप्पी साधे रहती हैं। इन विषयों पर खुलकर बात कर उनके संकोच को दूर किया जाएगा और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनाया जाएगा ताकि उन्हें समाज में एक अनुकूल और गरिमापूर्ण वातावरण मिल सके।

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