चातुर्मास के आगमन पर सेऊसर तालाब में महिलाओं ने किया जल एवं वृक्ष पूजन

 जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन का दिया संदेश, पारंपरिक संस्कृति का दिखा सुंदर संगम


फलोदी 24 जुलाई । चातुर्मास के पावन आगमन के साथ शुक्रवार को फलोदी के ऐतिहासिक एवं प्राचीन सेऊसर तालाब पर महिलाओं ने श्रद्धा और आस्था के साथ जल पूजन एवं वृक्ष पूजन का आयोजन किया। इस अवसर पर महिलाओं ने तालाब के पवित्र जल की पूजा-अर्चना कर क्षेत्र में सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा एवं जनकल्याण की कामना की।
कार्यक्रम के दौरान इन्द्रा बोहरा शान्ति देवी बबीता व्यास  तारा देवी कुसुम गायत्री मीना पुरोहित मोहन प्यारी पूर्णा महिलाओं ने तालाब परिसर में स्थित वृक्षों का भी विधि-विधान से पूजन कर पर्यावरण संरक्षण एवं प्रकृति के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में जल स्रोतों और वृक्षों को जीवन का आधार माना गया है तथा चातुर्मास के अवसर पर इनका पूजन प्रकृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने की परंपरा का प्रतीक है।

महिलाओं ने जल संरक्षण का संदेश देते हुए कहा कि ऐतिहासिक जलाशयों का संरक्षण केवल प्रशासन की ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि परंपराओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा जाए तो आने वाली पीढ़ियों को भी स्वच्छ जल और हरित वातावरण उपलब्ध कराया जा सकता है।


इस दौरान तालाब परिसर में धार्मिक माहौल बना रहा। महिलाओं ने मंगल गीत गाए, दीप प्रज्वलित किए तथा चातुर्मास के शुभारंभ पर परिवार और समाज की सुख-शांति एवं समृद्धि की मंगलकामना की।

उल्लेखनीय है कि फलोदी का ऐतिहासिक सेऊसर तालाब वर्षों से धार्मिक, सांस्कृतिक एवं जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण धरोहर रहा है। पर्यावरण प्रहरी लोगों ने संरक्षण और संवर्धन को लेकर स्थानीय नागरिकों एवं पर्यावरण प्रेमियों द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

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